Sunday, May 17, 2020

अचेतन मन में हूँ ।

कविता:- अचेतन मन में हूँ 

अचेतन मन में हूँ !

मुझे कोई चेतन मन में लाओ यारों, 

जिसे सुनने के लिए मन तरस गया 

कोई कहानी उसकी सुनाओ यारों 


वो रेत सी फिसली थी कि 

मैं भी ढेर हो गया हूँ वहीं,  

वो हवाओं के संग चली गई 

मैं गैर हो गया हूँ कहीं 


मैं मिट्टी हूँ ! 

कोई मूर्ति बनाओ यारों, 

वो भी मेरे दर पर पूजन करे 

मेरी कोई कीर्ति ऐसी बनाओ यारों 


वो छू ले अगर जो मुझमें जान आ जाए 

मूर्ति क्या पत्थर में भी प्राण आ जाए 

मुझे कोई मेरी जान से मिलाओ यारों 

अचेतन मन में हूँ , मुझे कोई ...... ।





About its creation:- 


ये कैसा शोर-शराबा है मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है लोगों को कहो ना मुझे मेरे टूटे दिल के साथ रहने दे मैं उस स्थिति में नहीं हूँ कि अभी मैं किसी को कुछ बता सकता हूँ । अगर किसी को कुछ करना ही है तो उन्हें कहो मुझे मेरा महबूब लाकर दे दे अगर नहीं लाकर दे सकता है तो मुझे मेरे महबूब के यादों के संग जीने दो । अगर इसके अलावा मुझसे कुछ पूछोगे तो मैं नहीं बता सकूंगा सिवाय महबूब के बातों के अगर किसी को मुझसे मेरे महबूब के बारे में सुनना है तो मैं बस उसी को गा रहा हूँ, आकर कोई सुन ले यह ऐसा गीत है कि मानो कभी खत्म नहीं होगा क्योंकि जो गा रहा हूँ वो लिख भी रहा हूँ अपनी तनहाई में उसकी बातें करना मुझे अच्छा लगता है इससे मैं अकेला महसूस नहीं करता हूँ । सभी को कह दो मुझे किसी की जरूरत नहीं है अगर इसके लिए मुझे कोई स्वार्थी कहता है तो उसे कह लेने दो, अज्ञानी कहता है तो कह लेने दो । मुझे किसी को कुछ साबित नहीं करना है अब साबित भी करेगा कोई तो वह मेरे शब्द , मेरे भाव होंगे भले उन्हें समझ में मेरे यहां से जाने के बाद आएगा उन्हें यह भी कह दो अभी मुझे समझने के लिए अपना सर ना फोड़े उनके लिए मैं कुछ यह भी नहीं पर समझ से उनके परे हूँ मैं !तुम मूर्ख हो क्या? , तुम पागल हो क्या?, तुम सनकी हो क्या? , तुम्हारा ध्यान कहाँ है? , मेरे सवालों का जवाब दो तुम्हें पता नहीं मैं तुमसे क्या पूछ रहा हूँ ? और  तुम्हें कुछ समझ में नहीं आता? अगर इतना आपको कोई कुछ कहे तो आप क्या कहेंगे? 

-हाँ मुझे कुछ समझ में नहीं आता और मुझे समझाने की कोशिश भी मत करें क्योंकि अंततः मैं अपने दिल की सुनूँगा और यह मेरे दिल की हिदायत है कि अगर मैंने अपने दिल के अलावा किसी और से बात करने की कोशिश की तो मेरा दिल मुझसे बात नहीं करेगा यही हालत इस प्रकार की कविता लिखने वाले कवि की होती है जब वह इस प्रकार की कविता लिखने लगता है तो वह हमेशा हर किसी के सवाल पर किंकर्तव्यविमूढ़ रहता है पर उसे एक आवाज हमेशा सुनाई देती है वह है उसके अपने दिल की ।

Thought:- 

कभी-कभी आपका सफर आपको लोगों के बीच अज्ञानी व मूर्ख बना सकता है पर आप चिंता ना करें आप लोगों से बेहतर होंगे ।

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